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ऑर्केस्ट्रा बार में ‘गुप्त कैविटी रूम’ का खुलासा, 13 महिलाएं रेस्क्यू

पहले से विवादित बार पर फिर कार्रवाई

मीरा-भायंदर: मीरा-भायंदर के भायंदर पूर्व स्थित एक ऑर्केस्ट्रा बार पर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई में 13 महिलाओं को मुक्त कराया गया, जिनमें से 6 महिलाएं एक गुप्त “कैविटी रूम” में बेहद अमानवीय हालात में छिपाई गई थीं।
क्राइम ब्रांच की यूनिट 1 ने 23 अप्रैल की आधी रात के बाद फाटक रोड स्थित अन्ना पैलेस ऑर्केस्ट्रा बार पर छापा मारा। यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक सुशीलकुमार शिंदे को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। टीम में महिला पुलिसकर्मी और पंच भी शामिल थे।
छापे के दौरान स्टेज पर चार महिलाएं कथित तौर पर अश्लील नृत्य करते हुए मिलीं, जिन्हें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। वहीं, तीन अन्य महिलाएं बार की छत पर बने मेकअप रूम में पाई गईं।

टाइल्स के पीछे छिपा था गुप्त कमरा
जांच के दौरान पुलिस को बाथरूम और सीढ़ियों के पास लगी टाइल्स में संदिग्ध गैप नजर आया। जांच आगे बढ़ाने पर टाइल्स के पीछे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से खुलने वाला लोहे का दरवाजा मिला। इसके अंदर करीब 8×2.5 फीट की संकरी कैविटी में 6 महिलाएं और एक नाबालिग लड़का ठुंसे हुए मिले, जहां घुटन भरी स्थिति थी।
संदीप डोईफोडे ने कहा, “यह अवैध गतिविधियों को छिपाने की सुनियोजित साजिश थी। कैविटी के अंदर की स्थिति अमानवीय थी और इससे जान को गंभीर खतरा था। सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।”

13 आरोपियों पर मामला दर्ज
इस मामले में बार मालिक, मैनेजर, स्टाफ और कुछ ग्राहकों सहित कुल 13 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। सभी 13 महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पहले भी विवादों में रहा बार
जानकारी के अनुसार, बार मालिक बीजेपी नगरसेवक और पोलिटिकली काफी इन्फुलेनशियल माने जाने वाले गणेश शेट्टी का है। यह प्रतिष्ठान पहले भी नियम उल्लंघन के मामलों में घिर चुका है। इमारत को महानगरपालिका द्वारा अवैध घोषित किया जा चुका था और इसका शराब लाइसेंस भी पहले रद्द किया गया था। हालांकि बाद में “डांस बार नहीं चलाने” की शर्त पर लाइसेंस बहाल किया गया था, लेकिन यहां ऑर्केस्ट्रा बार के नाम पर गतिविधियां जारी थीं।
इससे पहले भी इस प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों पर अनैतिक तस्करी निवारण अधिनियम (PITA) के तहत मामले दर्ज हो चुके हैं। 2012 में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश और 2013 में महानगरपालिका की कार्रवाई के बावजूद यह ढांचा अब तक संचालित हो रहा है, जिससे नियामक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
डीसीपी डोईफोडे ने आगे कहा,“लाइसेंसिंग और नियामक प्रक्रिया की पूरी जांच की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
इस घटना ने एक बार फिर मीरा-भायंदर क्षेत्र में अवैध डांस बार, अनधिकृत निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

Chief Editor – Yusuf Patel

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