बच्चूकडूबनेंगेशिवसैनिक? हाथमेंथामेंगेधनुष-बाण; महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। प्रहार जनशक्ति पक्ष के प्रमुख और पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि वे अब शिवसेना के धनुष-बाण के साथ मिलकर काम करेंगे। बच्चू कडू का शिवसेना में शामिल होने का फैसला न केवल उनके राजनीतिक भविष्य के लिए, बल्कि महाराष्ट्र के लाखों दिव्यांगों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिव्यांग मंत्रालय के मजबूती पर जोर
बच्चू कडू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं शिवसेना का धनुष-बाण अब दिव्यांगों के हितों के लिए हाथ में लेने जा रहा हूं। उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र में दिव्यांगों के लिए अलग मंत्रालय तो स्थापित हो गया, लेकिन जिस स्तर पर उसका सशक्तिकरण होना चाहिए था, वह अभी तक नहीं हो पाया है। मंत्रालय के पास अधिकार और संसाधन तो हैं, लेकिन उनका लाभ जमीन पर हर दिव्यांग तक नहीं पहुंच रहा है।
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प्रहार का अस्तित्व और शिवसेना की मजबूती
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि क्या बच्चू कडू अपनी प्रहार जनशक्ति पार्टी को खत्म कर देंगे? इस पर स्थिति साफ करते हुए उन्होंने कहा कि प्रहार संगठन अपना अस्तित्व कायम रखेगा। संगठन के जरिए सामाजिक कार्यों को किया जाएगा, लेकिन राजनीतिक रूप से शिवसेना को मजबूत करना अब उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि यदि शिवसेना की ताकत बढ़ती है, तो उससे दिव्यांगों के मुद्दों को सुलझाने में भी सरकार के भीतर अधिक शक्ति मिलेगी।
एकनाथ शिंदे के साथ बढ़ती नजदीकी
गौरतलब है कि शिवसेना के साथ बच्चू कडू पहले से ही गठबंधन में रहे हैं। लेकिन अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी के चुनाव चिह्न धनुष-बाण थामने की बात कहकर उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वे पूरी तरह से चुनावी और प्रशासनिक मोर्चे पर शिवसेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
बच्चू कडू महाराष्ट्र की राजनीति में अपने आक्रामक तेवर और गरीबों-दिव्यांगों के लिए किए गए आंदोलनों के लिए जाने जाते हैं। उनके इस फैसले से ग्रामीण इलाकों और वंचित वर्गों में बड़ा फायदा मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि इस नए समीकरण से दिव्यांग मंत्रालय के कामकाज में कितनी तेजी आती है।

Chief Editor – Yusuf Patel