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“‘गेट आउट ऑफ हियर!’: गिरीश महाजन के मोर्चे में महिला का गुस्सा, ट्रैफिक जाम पर सड़क पर ही घेरा

मुंबई। महिलाओं के सम्मान के नाम पर निकली पदयात्रा के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति बन गई जब एक आम महिला ने बीच सड़क पर ही गिरीश महाजन को घेर लिया और जमकर खरी-खोटी सुनाई। मामला वरली इलाके का है, जहां महायुति की ओर से महिला आरक्षण के समर्थन में “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” निकाली गई थी। यह पदयात्रा जांबोरी मैदान से एनएससीआई डोम तक आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और कार्यकर्ता शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण इलाके में भीषण ट्रैफिक जाम हो गया और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक महिला, जो कथित तौर पर जॉगिंग के लिए निकली थी, ट्रैफिक में फंस गई और गुस्से में सीधे मंत्री गिरीश महाजन तक पहुंच गई। मीडिया से बातचीत कर रहे महाजन को बीच में रोकते हुए महिला ने अंग्रेजी में कहा, “आपको जो कहना है मैदान में जाकर कहिए, सड़क क्यों जाम कर रहे हैं? गेट आउट ऑफ हियर!” पहले तो महाजन ने उसकी बात शांतिपूर्वक सुनी, लेकिन जब भीड़ नहीं हटी तो महिला दोबारा लौटी और और भी तीखे अंदाज में बोली—“समझ में नहीं आता क्या? पीछे सैकड़ों गाड़ियां फंसी हैं, रास्ता खाली करो!” स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया, लेकिन महिला का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उसने पुलिस को भी फटकार लगाते हुए कहा कि कोई उससे बात न करे और सवाल उठाया कि ट्रैफिक जाम के बावजूद प्रशासन मूकदर्शक क्यों बना हुआ है। यहां तक कि उसने किसी को भी उसे छूने की चेतावनी दी। बाद में वह खुद ही वहां से निकल गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। विपक्षी नेताओं ने इसे मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। वहीं विजय वडेट्टीवार ने तंज कसते हुए कहा कि “महिला आरक्षण के नाम पर दिखावा करने वालों को एक आम महिला ने ही आईना दिखा दिया।” रोहित पवार ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हजारों पर भारी एक नारी” का यह उदाहरण भाजपा की कथित राजनीति को उजागर करता है। दूसरी ओर, गिरीश महाजन ने सफाई देते हुए कहा कि महिला ट्रैफिक जाम के कारण नाराज थी। उन्होंने पदयात्रा को महिलाओं के अधिकार और सम्मान के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रदर्शन था।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि महिलाओं के समर्थन में निकला मोर्चा ही जब आम महिला के गुस्से का कारण बन जाए, तो क्या ऐसे आयोजनों की रणनीति पर पुनर्विचार जरूरी नहीं है?

Chief Editor – Yusuf Patel

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