मीरा-भायंदर में नालेसफाई: मैंग्रोव अनुमति पर संयुक्त बैठक, मंजूरी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

मीरा-भायंदर: मीरा-भायंदर महानगरपालिका क्षेत्र में प्री-मानसून नालेसफाई के लिए मैंग्रोव (कांदळवन) क्षेत्रों में आवश्यक अनुमति को लेकर बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक, उप सचिव मिलिंद म्हैसकर, महापौर डिंपल मेहता, मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा, उप महापौर ध्रुवकिशोर पाटील, शहर अभियंता दीपक खांबीत, उपायुक्त सचिन बांगर तथा मैंग्रोव विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
महापौर ने बताया कि शहर के 31 नालों में से कई खाड़ी किनारे स्थित नालों में घने मैंग्रोव के कारण जल प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे नालेसफाई में कठिनाई आती है और मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है।
“खाड़ी किनारे नालों में मैंग्रोव की वृद्धि से जल निकासी बाधित हो रही है, जिससे मानसून में बाढ़ जैसी स्थिति बनती है,” महापौर ने कहा।
महानगर पालिका आयुक्त ने शहर की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर राष्ट्रीय उद्यान और दूसरी ओर समुद्र होने के कारण उच्च ज्वार और भारी वर्षा के समय जलभराव की समस्या और गंभीर हो जाती है। “समय पर अनुमति मिलना जरूरी है, ताकि जल निकासी सुचारू रह सके और जलभराव से बचा जा सके,” आयुक्त ने कहा।
मैंग्रोव सेल के अधिकारी गोवेकर ने जानकारी दी कि 19 स्थानों पर सर्वेक्षण जारी है और शेष स्थानों का सर्वेक्षण 24 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक अनुमति जारी की जाएगी।
वन मंत्री गणेश नाईक ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार जल्द से जल्द सर्वेक्षण पूरा कर अनुमति प्रदान करें।
“कानूनी प्रावधानों के तहत शीघ्र अनुमति दी जाए, ताकि मानसून से पहले नालेसफाई का कार्य पूरा हो सके,” नाईक ने निर्देश दिए।
इस दौरान उप महापौर ध्रुवकिशोर पाटील ने ‘सूर्या जल आपूर्ति परियोजना’ का मुद्दा उठाते हुए बताया कि परियोजना का लगभग 90% कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कवडासा में 132 केवी उच्चदाब लाइन का कार्य वन भूमि अनुमति के अभाव में लंबित है।
इस पर वन मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों की मंजूरी शीघ्र दी जाए, ताकि महत्वपूर्ण परियोजना में देरी न हो।

Chief Editor – Yusuf Patel